vafaa ki raah men dushvaariyaañ bahut si hain | वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ बहुत सी हैं

  - Nirmal Nadeem

वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ बहुत सी हैं
मगर जुनूँ की भी तय्यारियाँ बहुत सी हैं

जलाल अपनी मोहब्बत का सब से ऊँचा है
बदन में ऐसे तो बीमारियाँ बहुत सी हैं

हमारे पास फ़क़त दिल का दर्द है लेकिन
तुम्हारे पास तो अय्यारियाँ बहुत सी हैं

हर एक शख़्स की फ़िक्रें जुदा जुदा ठहरीं
जहान-ए-आम में ख़ुद्दारियाँ बहुत सी हैं

वफ़ा की सारी मिसालें गिना तो दूँ लेकिन
वतन में अपने भी ग़द्दारियाँ बहुत सी हैं

दिलों में पलते हुए ख़्वाब जानते ही नहीं
तबाह करने को बे-कारियाँ बहुत सी हैं

किसी ने मुझ से कहा था कि यार सुन तो सही
अदा में हुस्न की मक्कारियाँ बहुत सी हैं

सजी है बज़्म-ए-मोहब्बत ये जान किस के लिए
यहाँ तो लोगों में बेज़ारियाँ बहुत सी हैं

'नदीम' क्यूँँ तू तह-ए-इज़्तिराब डूब गया
दिलों के खेल में भी पारियाँ बहुत सी हैं

  - Nirmal Nadeem

Bhai Shayari

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