किसी से फिर ये दिल अपना लगा कर देख लेते हैं
नसीब अपना है कैसा आज़मा कर देख लेते हैं
उन्हें जब कुछ नहीं मिलता है बहलाने को दिल अपना
वो मेरी ओर अक्सर मुस्कुरा कर देख लेते हैं
बहुत रोए बहुत टूटे न दिल को पर सुकूँ आया
चलो इक रोज़ हम भी मुस्कुरा कर देख लेते हैं
— Praveen Sharma SHAJAR















