मुझ को केवल बदनामी का डर है दोस्त
वरना इश्क़ मुझे तुझ से बढ़कर है दोस्त
जैसी बातें करते हो तुम मुझ से अब
उन बातों से ख़ामोशी बेहतर है दोस्त
रस्ते कैसे रस्ते मंज़िल क्या मंज़िल
बंजारा हूँ हर दिन नया सफ़र है दोस्त
— Praveen Sharma SHAJAR
वरना इश्क़ मुझे तुझ से बढ़कर है दोस्त
जैसी बातें करते हो तुम मुझ से अब
उन बातों से ख़ामोशी बेहतर है दोस्त
रस्ते कैसे रस्ते मंज़िल क्या मंज़िल
बंजारा हूँ हर दिन नया सफ़र है दोस्त
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