ज़िन्दगी कट गई अज़िय्यत मेंयाद सबने किया ज़रूरत मेंग़म , ख़ुशी ,याद और हर ख़्वाहिशलिख रहा हूँ मैं "दोस्त" इस ख़त मेंइक कहानी को दफ़्न होना थाएक दीवार की मरम्मत मेंघर में नान ओ नमक ज़रूरी थाएक फ़न दब गया मईशत मेंमुझ को परवाज़ की थी चाह बहुतपर रिहाई नहीं थी क़िस्मत मेंहिज्र की आग ने मुझे माराहो गया ख़ाक मैं भी फ़ुर्क़त में— Rahul Gurjar