पहले तो किनारों से किनारे हुए दरिया
फिर देखते ही देखते कस्बे हुए दरिया
हम को ये सहूलत किसी के हिज्र से आई
बस देखने की चीज़ थी बहते हुए दरिया
ज़ख़्मों से समझ आएगी क़ीमत हमें अपनी
पत्थर से वहल जाएँगे सह
में हुए दरिया
हर वक़्त ज़रूरत से ज़ियादा बहे आँसू
आँखें हैं मेरी शोर मचाते हुए दरिया
टुकड़ों में ज़मी पेड़ जुदा हो गए ख़ुद से
उस हादसे के बा'द बहुत से हुए दरिया
फिर एक धमाके ने हर इक चीज़ बदल दी
पानी था जिधर रेत के टीले हुए दरिया
— Rahul Gurjar















