इक दूसरे को छोड़ के जाने की बात हैअपनी नहीं ये सारे ज़माने की बात हैबस यूँ समझ लो उन से मेरा कद बलंद हैजिन के लबों पे मुझ को गिराने की बात है— Kashif Sayyed