हर एक हाथ तराज़ू दिखाई देता है
उसे तो फूल भी चाकू दिखाई देता है
फँसे हुए नहीं हैं हम धँसे हुए हैं यार
तुझे निकलने का पहलू दिखाई देता है
तेरे बदलने ने इक बात साफ़ कर दी है
नज़र का धोखा ही जादू दिखाई देता है
मेरे क़रीब आ तू देख मुझ को सामने से
मैं तुझ को दिखता हूँ या तू दिखाई देता है
ज़मीन वालों की बुनियाद इस से रौशन है
तुम्हें जो छोटा सा जुगनू दिखाई देता है
— Rahul Gurjar















