ख़ुदाया और क्या मैं चाहता
कि बस अपना पता मैं चाहता
मुझे बस प्यार हैं उस सेे यहाँ
न कुछ उसके सिवा मैं चाहता
जिसे चाहा कभी मैनें बहुत
उसे अब भूलना मैं चाहता
तुझी से बस मुझे वैसा मिला
कि जैसा प्यार था मैं चाहता
दिया जिसने मुझे ये जख्म है
उसी से अब दवा मैं चाहता
कि आँखों की ख़ुशी के वास्ते
तुझी को देखना मैं चाहता
उसे भी प्यार हो मुझ सेे बहुत
यहीं तो बस ख़ुदा मैं चाहता
तिरे ही पास आना है मुझे
तिरा ही बस पता मैं चाहता
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