चलता नहीं हूँ अब मैं रस्ता देख कर
उस की गली में रुक गया क्या देख कर
इक रोज़ उस ने ख़ुद-कुशी की बात की
अब सहम जाता हूँ मैं दरिया देख कर
यूँ ही अकेले तन्हा रहने दो मुझे
उस को बुरा लगता है अच्छा देख कर
डर है मुझे हामी न भर दे वो कहीं
आई है कल ही एक लड़का देख कर
— Raj Sengar















