बिछड़ गए तो तमाशा नहीं किया हमने
तुम्हें जमाने में रुसवा नहीं किया हमने
तुम्हारे दिल से नज़र फेर कर चले आए
तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-काबा नहीं किया हमने
हमारे साथ में धोखा हुआ ब-नाम-ए-शग़फ़
किसी के साथ में धोखा नहीं किया हमने
तुम्हारी ज़ीस्त जुड़ी है हमारी ज़ीस्त के साथ
यूँँ ख़ुद-कुशी का इरादा नहीं किया हमने
हमारा दिल न झुका दिल से जब तलक वाइज़
ख़ुदा के सामने सज्दा नहीं किया हमने
मिली बुलंदी तो इंसानियत की हद में रहे
रिवायतों से किनारा नहीं किया हमने
ख़ुलूस-ए-दिल से निभाए तअल्लुक़ात शजर
क़राबतों में दिखावा नहीं किया हमने
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