बिछड़ गए तो तमाशा नहीं किया हम ने

तुम्हें जमाने में रुसवा नहीं किया हम ने

तुम्हारे दिल से नज़र फेर कर चले आए
तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-काबा नहीं किया हम ने

हमारे साथ में धोखा हुआ ब-नाम-ए-शग़फ़
किसी के साथ में धोखा नहीं किया हम ने

तुम्हारी ज़ीस्त जुड़ी है हमारी ज़ीस्त के साथ
यूँ ख़ुद-कुशी का इरादा नहीं किया हम ने

हमारा दिल न झुका दिल से जब तलक वाइज़
ख़ुदा के सामने सज्दा नहीं किया हम ने

मिली बुलंदी तो इंसानियत की हद में रहे
रिवायतों से किनारा नहीं किया हम ने

ख़ुलूस-ए-दिल से निभाए तअल्लुक़ात शजर
क़राबतों में दिखावा नहीं किया हम ने

— Shajar Abbas

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