jab se dekhi hain in aankhoñ ne tumhaari aankhen | जब से देखी हैं इन आँखों ने तुम्हारी आँखें

  - Shajar Abbas

जब से देखी हैं इन आँखों ने तुम्हारी आँखें
तब से आँखों पे फ़िदा हैं ये हमारी आँखें

दिल चला आएगा शागिर्दगी करने इनकी
करने लग जाएँ अगर नज़्म-निगारी आँखें

आप का फ़िक़रा सरा सर ये ग़लत फ़िक़रा है
एक ही जैसी हुआ करती हैं सारी आँखें

ऐ हसीं शख़्स मैं इन फूल से दो होंठों से
गर इजाज़त हो तिरी चूम लूँ प्यारी आँखें

मेरी आँखों पे तिरी आँखें हुई हैं वारी
तेरी आँखों पे शजर जाएँ ये वारी आँखें

  - Shajar Abbas

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