kahaanii 'ishq ki apni suna ke pachhtaaye | कहानी 'इश्क़ की अपनी सुना के पछताए

  - Shajar Abbas

कहानी 'इश्क़ की अपनी सुना के पछताए
अमीर ज़ादी से हम दिल लगा के पछताए

तमाम 'उम्र जिसे चाहा टूटकर हमने
ये बात उससे छुपाई छुपा के पछताए

हमारे दिल पे हमारा अब इख़्तियार नहीं
निगाह उनकी नज़र से मिला के पछताए

हमारे दस्त-ए-हुनर कर दिए क़लम यारों
ग़ज़ब है ताजमहल को बना के पछताए

तुम्हारी याद में रोना नहीं था हमको कभी
तुम्हारी याद में आँसू बहा के पछताए

पलट के पीछे ना देखोगे था यक़ीन हमें
सदा लगाई तुम्हें और लगा के पछताए

जहाँ पे मिलते थे हर शाम एक दूजे से हम
तुम्हारे बाद वहाँ जान जा के पछताए

  - Shajar Abbas

Budhapa Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Budhapa Shayari Shayari