ख़ुशनुमा होगा मेरा सारा नगर ईद के दिन
और फिर जाएँगे हमसाए के घर ईद के दिन
बा रिदा होके सर-ए-बाम वो जब आएगी
सारी बस्ती की नज़र होगी उधर ईद के दिन
ऐ ख़ुदा रहम-ओ-करम रखना मेरे हमदम पर
उसको लग जाए न दुनिया की नज़र ईद के दिन
मुझसे कहने लगी में तुमसे नहीं बोलूँगी
तुम जो घर पर न मेरे आए अगर ईद के दिन
जब कहा मैंने लगा लो गले वो कहने लगी
मैं गले तुमको लगाऊँगी शजर ईद के दिन
जो था माज़ी में किया हमसे करो वा'दा वफ़ा
और मिलो आके गले लख़्त-ए-जिगर ईद के दिन
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