jab teer ban ke jumla zabaan se nikal gaya | जब तीर बन के जुमला ज़बाँ से निकल गया

  - Shajar Abbas

जब तीर बन के जुमला ज़बाँ से निकल गया
महफ़िल का जो निज़ाम था पल में बदल गया

ख़ून-ए-जिगर को वो तिरे चेहरे पे मल गया
ये बात सुन के आज मिरा दिल दहल गया

सर पीट कर बयान ये करता है बाग़बाँ
पैरों तले वो गुल के बदन को कुचल गया

हाए शजर मलाल फ़िलिस्तीन की तरह
लो आज उसके दिल का भी नक़्शा बदल गया

  - Shajar Abbas

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