जब तीर बन के जुमला ज़बाँ से निकल गया
महफ़िल का जो निज़ाम था पल में बदल गया
ख़ून-ए-जिगर को वो तिरे चेहरे पे मल गया
ये बात सुन के आज मिरा दिल दहल गया
सर पीट कर बयान ये करता है बाग़बाँ
पैरों तले वो गुल के बदन को कुचल गया
हाए शजर मलाल फ़िलिस्तीन की तरह
लो आज उसके दिल का भी नक़्शा बदल गया
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