basar yuñ zindagaani ho rahi hai | बसर यूँँ ज़िंदगानी हो रही है

  - Shajar Abbas

बसर यूँँ ज़िंदगानी हो रही है
हर इक पल मय परस्ती हो रही है

मैं उसकी सम्त देखे जा रहा हूँ
वो लड़की मुझ पे वारी हो रही है

तेरे वादों को तुझको याद करके
मुसलसल अश्क-बारी हो रही है

हमारा हिज्र उसको भा रहा है
वो पहले से भी प्यारी हो रही है

दहकता है मुनाफिक़ का कलेजा
हमारी अग्द-ख़्वानी हो रही है

चलो आकर मुझे पहनाओ कंगन
मेरी सूनी कलाई हो रही है

उन्हें मरकर दिखाना पड़ रहा है
तो साबित बेगुनाही हो रही है

मेरी नज़रें हैं इक चेहरे के ऊपर
नए ढंग से पढ़ाई हो रही है

तुम इक लब चूम के जो जा रहे हो
मोहब्बत में उधारी हो रही है

'शजर' ये सोच के हैराँ है हरदम
क्यूँ मुझसे बे-वफ़ाई हो रही है

  - Shajar Abbas

One sided love Shayari

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