jisko gham-e-hayaat ka matlab nahin pata | जिसको ग़म-ए-हयात का मतलब नहीं पता

  - Shajar Abbas

जिसको ग़म-ए-हयात का मतलब नहीं पता
उसको किसी भी बात का मतलब नहीं पता

बोसे का कोई नक़्श नहीं हुस्न पर तिरे
यानी तुझे ज़कात का मतलब नहीं पता

हमने शब-ए-फ़िराक़ ही झेली है 'उम्र भर
हमको मिलन की रात का मतलब नहीं पता

महफ़ूज़ है जहान के हर हादसात से
इसको यूँँ हादसात का मतलब नहीं पता

तर्क-ए-तअल्लुक़ात ही कर ले अगर तुझे
लफ़्ज़-ए-तअल्लुक़ात का मतलब नहीं पता

ख़ाइफ़ हो अपनी ज़ीस्त से तुम इसलिए शजर
तुमको ख़ुदा की ज़ात का मतलब नहीं पता

  - Shajar Abbas

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