जिसको ग़म-ए-हयात का मतलब नहीं पता
उसको किसी भी बात का मतलब नहीं पता
बोसे का कोई नक़्श नहीं हुस्न पर तिरे
यानी तुझे ज़कात का मतलब नहीं पता
हमने शब-ए-फ़िराक़ ही झेली है 'उम्र भर
हमको मिलन की रात का मतलब नहीं पता
महफ़ूज़ है जहान के हर हादसात से
इसको यूँँ हादसात का मतलब नहीं पता
तर्क-ए-तअल्लुक़ात ही कर ले अगर तुझे
लफ़्ज़-ए-तअल्लुक़ात का मतलब नहीं पता
ख़ाइफ़ हो अपनी ज़ीस्त से तुम इसलिए शजर
तुमको ख़ुदा की ज़ात का मतलब नहीं पता
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