khizaan ne loot liya hai haseen bahaaron ko | ख़िज़ाँ ने लूट लिया है हसीं बहारों को

  - Shajar Abbas

ख़िज़ाँ ने लूट लिया है हसीं बहारों को
सुकून कैसे मय्यसर हो ग़म के मारों को

किसी ने हाथ बढ़ाया नहीं मदद के लिए
सदाएँ देता रहा मैं तमाम यारों को

जो आसमाँ में उड़ो तो ये सोच कर उड़ना
ज़मीं पे गिरना ही पड़ता है शह सवारों को

लो अपने पहलू में रक्खो कि कान में पहनो
मैं ले के आ गया गर्दूं से चाँद तारों को

कभी वो देके कभी लेके आज़माता है
ज़माना समझा न क़ुदरत के इन इशारों को

वो जिसके वास्ते मैं फूल लेने आया था
बिछा रहा था मिरी राह में वो ख़ारों को

ये जो दरारे हैं फ़ुर्क़त की ख़ाना-ए-दिल में
बताओ कैसे भरूँगा मैं इन दरारों को

तुम्हारी लाश 'शजर' मौजे साथ लाई थीं
हमारी लाश ने ढूँढा है ख़ुद किनारों को

  - Shajar Abbas

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