कोई साथी पुराना मिल गया है
मुझे खोया ज़माना मिल गया है
भले ही क़ैद-ख़ाना मिल गया है
शजर को आशियाना मिल गया है
तुम्हें पाकर हमें ये लग रहा है
ज़माने का ख़ज़ाना मिल गया है
ख़ुदा का शुक्र इस नफ़रत के वन में
हमें दिल आशिक़ाना मिल गया है
ज़माना चाहे जितने दर्द दे अब
हमें रोने को शाना मिल गया है
हमारे दिल की सूरत इस जहाँ में
ग़मों को भी ठिकाना मिल गया है
शजर जल्दी करो जन्नत का सौदा
अगर बहलोल दाना मिल गया है
— Shajar Abbas















