तुम शब-ए-वस्ल तकासुर से इबादत करना
नाम लेना मिरा चेहरे की ज़ियारत करना
मैंने ये कह के उसे सौंप दीं अपनी आँखें
हो सके तो मिरे ख़्वाबों की हिफ़ाज़त करना
देख लेना ये तुम्हें भारी पड़ेगा इक दिन
हुस्न के शहर में नज़रों का शरारत करना
अपने बच्चों को ये बचपन से सिखाओ लोगों
जुर्म होता है सितमगर की हिमायत करना
हज़रत-ए-क़ैस ख़िताबत के लिए आऍंगे
मजलिस-ए-हिज्र में तुम वक़्त पे शिरकत करना
'उम्र लग जाती है इस फ़ेल के अन्दर साहब
इतना आसान नहीं दिल पे हुकूमत करना
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