dil men toofaan mohabbat ka utha aap se aap | दिल में तूफ़ान मोहब्बत का उठा आप से आप

  - Shajar Abbas

दिल में तूफ़ान मोहब्बत का उठा आप से आप
हमने दुश्मन को दी जीने की दुआ आप से आप

सोचते रहते हो हर वक़्त ये क्या आप से आप
एक दिन पास बुला लेगा ख़ुदा आप से आप

मैंने जब भी तेरे बारे में है कुछ सोच लिया
ज़ख़्म फिर होने लगा दिल का हरा आप से आप

बंद आँखों को किया और तेरा नाम लिया
और फिर बनने लगा चेहरा तेरा आप से आप

किसलिए ख़ुद को परेशान करें इनके लिए
ज़ख़्म बन जाते हैं ज़ख़्मों की ग़िज़ा आप से आप

नाम जब अर्श के सीने पे लिखा मैंने तिरा
अर्श की आँखों से कुछ आब गिरा आप से आप

पहले हम कहते थे हम आपके हैं माना नहीं
और अब अपना हमें मान लिया आप से आप

आइए आज चलें कू-ए-सनम चलते हैं
दफ़'अतन हज़रत-ए-दिल ने ये कहा आप से आप

इक झलक पाने को सब बूढ़े जवाँ दौड़ पड़े
चाँद से चेहरे से जब सरकी रिदा आप से आप

एड़ियाँ अपनी रगड़ने लगा दिल सीने में
दर्द जब होने लगा हद से सिवा आप से आप

शोर की पहुँची हर इक बहरे के कानों में सदा
शोर गूँगे ने 'शजर' जब भी किया आप से आप

  - Shajar Abbas

Shaheed Shayari

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