वक़्त अपना ख़राब मत करना
इंतिज़ार-ए-गुलाब मत करना
जुर्म का इंतिख़ाब मत करना
ख़ुद पे नाज़िल अज़ाब मत करना
लाख बदले रविश ज़माने की
ख़ुद को तुम बे-हिजाब मत करना
'इश्क़ करना है तो करो मुझसे
हाँ मगर बे-हिसाब मत करना
चूम लेना लबों से पेशानी
आप तौहीन-ए-ख़्वाब मत करना
जान ले लेगी सादगी तेरी
सादगी से ख़िताब मत करना
जिस्म जल जाएगा तिरा ऐ गुल
बैअत-ए-आफ़ताब मत करना
फूल चुनना शजर से आकर तुम
ख़ार का इंतिख़ाब मत करना
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