gham manao ki aziyyat ki rasan baandh gaya | ग़म मनाओ कि अज़िय्यत की रसन बाँध गया

  - Shajar Abbas

ग़म मनाओ कि अज़िय्यत की रसन बाँध गया
दिल की गर्दन में वो फ़ुर्क़त की रसन बाँध गया

चीख़ता रह गया मत बाँध ये नफ़रत की रसन
वो मगर नफ़रती नफ़रत की रसन बाँध गया

खोलकर हुस्न के हाथों से बड़े शौक़ से वो
मन की आँखों में मुहब्बत की रसन बाँध गया

क्या शिकायत हो बता उसकी शिकायत की भला
लब के शानों में शिकायत की रसन बाँध गया

किस तरह दिल में क़दम रक्खे मोहब्बत ये शजर
दिल के दरवाज़े पे हैबत की रसन बाँध गया

  - Shajar Abbas

Udas Shayari

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