Aarush Sarkaar

Aarush Sarkaar

@The_aarushsarkaar

Aarush Sarkaar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Aarush Sarkaar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

छुप के हम अँधेरों में देखते रहे अक्सर दूर से सदा देकर रौशनी बुलाती थी — Aarush Sarkaar
सैकड़ों दुख हैं मुझे तुझ सेे जुदा रहने के, एक दुख ये कि हमारी कोई तस्वीर नहीं — Aarush Sarkaar
लग गई मुझ को नज़र बेशक तुम्हारी आईनों मैं बहुत ख़ुश था किसी इक सिलसिले से उन दिनों — Aarush Sarkaar
तेरे माथे पर जो दुख लिक्खे हैं इनको चूम के अपना कर लूंँगा मैं — Aarush Sarkaar
कोई दुनिया से कटता जा रहा है किसी के घर पे रिश्ते आ रहे हैं — Aarush Sarkaar
बस इतनी सी कमी है करवटों में तुझे पाते नहीं हम बाज़ुओं में — Aarush Sarkaar
कर दिया है दिल हवाले आप के क्या इरादे हों न जाने आप के — Aarush Sarkaar
ज़ौक़ से जो पूछते दीवाने हो? शौक़ से फिर हम भी कहते, आप के — Aarush Sarkaar
बारहा ख़्वाब देखो उल्फ़त के दिल बना ही है टूटने के लिए — Aarush Sarkaar
देखो, हम ने दोस्ती में हद कर रक्खी है सोचो, ज़रा मोहब्बत कैसे निभाई होगी — Aarush Sarkaar
ख़ुद को जितना छुपाया दुनिया से उतना ज़ाहिर हुआ तिरे आगे — Aarush Sarkaar
रोना धोना बचपन है प्यारे समझा कुछ जीवन में ही इक वन है प्यारे समझा कुछ — Aarush Sarkaar
तेरी क़ुरबत जिन्हें मुयस्सर हैं जाने किन हाथों के मुक़द्दर हैं — Aarush Sarkaar
तू किसी ग़ैर-मुक़द्दर की ख़ुशी है लड़की हम तुझे सोच के तो हँस भी नहीं सकते हैं — Aarush Sarkaar
सिवा इस के कुछ अच्छा ही नहीं लगता है शामों में सफ़र कैसा भी हो घर को परिंदे लौट जाते हैं — Aarush Sarkaar
हमारे दर्द के यूँँ हल नहीं हैं वगरना चारा-गर पागल नहीं हैं — Aarush Sarkaar
ये निगाहें हैं हमारी हाँ मगर रहते हैं याँ ख़्वाब सारे आप के — Aarush Sarkaar
सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है — Aarush Sarkaar
इसी इक बात की हम को तसल्ली है कोई हमदर्द हो न हो, उदासी है — Aarush Sarkaar
हर इक दुख पर रोना हरगिज़ काम नहीं इन आँखों का दर्द रखा जाता है दिल में, दिल में रहने वालों का — Aarush Sarkaar

Ghazal

अपना क्या है हम तो साहब कुछ भी कहते बोलते हैं लोग शातिर हैं बड़ा ही, जो समझ के बोलते हैं वस्ल में अंधा है कोई, हिज़्र में बाग़ी है कोई सब्ज़ पत्ते बे - ज़बाँ हैं ख़ुश्क पत्ते बोलते हैं जलवों के दम पर चलाती थी जिसे तू पागलों सा नाम उस का चल रहा है और जलवे बोलते हैं क्या कमी है साथ चलने वालों की तुझ को यहाँ अब तेरी इक आवाज़ पर ख़ामोश रस्ते बोलते हैं कब तलक अटके रहोगे, कब लबों को चूमना है? गाल चूमूँ तो मुझे ये उस के झुमके बोलते हैं क्या तुम्हारा भी कभी झगड़ा हुआ है इनसे भाई ? या हमारे सामने ही घर के शीशे बोलते हैं पीर इक इक हर्फ़ की है जान ''आरुस को पता, और लोग कहते हैं कि 'आरुस शे'र अच्छे बोलते हैं — Aarush Sarkaar
इक सदा हम को तेरे हर हाल की भी आ रही है यार इतना भी न बन अब हम को हिचकी आ रही है उस की खुदगर्ज़ी को गुल बेचारा ये समझा कि बे-शक उस सेे मिलने को ही रोज़ाना वो तितली आ रही है मोजिज़ा था या शरारत रात की मालूम नहीं ये नींद में कल ख़्वाब देखा नींद अच्छी आ रही है शहर के उस के सुख़न-फ़हमों ने है हम को बुलाया किस की चिट्ठी आनी थी और किस की चिट्ठी आ रही है इश्क़ में तोहफ़े ये सब उस सेे मिले हैं हम को साहब इस घड़ी को देखिए आप और अँगूठी आ रही है गोली ना चल जाए मेरी साइकिल से उतरो भी अब रस्ता पूरा हो गया तेरी हवेली आ रही है इक ज़माने से मैं तन्हा जागता हूँ और ''आरुस उम्र इक गुज़री है शब ये तन्हा सोती आ रही है — Aarush Sarkaar