महफ़िल में हम जो नाम नसब पूछने लगे
क्या हो गया है आपको सब पूछने लगे
मुझको बता उदासी उसे क्या जवाब दूँ
गर कोई राह-ए-बज़्म-ए-तरब पूछने लगे
हमसे कहा जब उसने कि सब रब पे छोड़ दो
हम जा के रब से मर्ज़ी-ए-रब पूछने लगे
इस्म-ए-अली को ज़ीनत-ए-लब मैंने कर लिया
जब लोग इस्म-ए-शेर-ए-अरब पूछने लगे
तोहफ़े में यार देके उदासी हमें शजर
हमसे उदासियों का सबब पूछने लगे
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