hua hooñ jab se main beemaar hai ye dar mujhko | हुआ हूँ जब से मैं बीमार है ये डर मुझको

  - SHIV SAFAR

हुआ हूँ जब से मैं बीमार है ये डर मुझको
कहीं न करने लगे अब दवा असर मुझको

ये सोच कर ही कई शब मैं सो नहीं पाया
वो जागती भी कभी होगी सोच कर मुझको

उसे लगे न मुझे ग़म है उसके जाने का
सो कहना होगा ये पहले से थी ख़बर मुझको

अब इस सेे ज़्यादा पराया मैं ख़ुद को क्या समझूँ
कि याद आने लगा है ख़ुद अपना घर मुझको

ये मेरा दावा है मैं और याद आऊँगा
न हो यक़ीन तो फिर देखो छोड़ कर मुझको

'अजब सितम है जिसको आज हँस के टाल दिया
रुलाने वाली है वो बात 'उम्र भर मुझको

ये मंज़िलें तो मुसाफ़िर बिगाड़ देती हैं
है शुक्रिया कि सँभाले है ये सफ़र मुझको

  - SHIV SAFAR

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