kar rahein gham ye mujh | कर रहें ग़म ये मुझ

  - SHIV SAFAR

कर रहें ग़म ये मुझ
में अब भी क्या
मुझ
में तुम आज भी हो बाक़ी क्या

मुझको रोना भी अब नहीं आता
तुमने कर ली किसी से शादी क्या

कुछ तेरी यादें कुछ तेरी बातें
मुझ
में अब और मेरा है ही क्या

कल तेरी याद फिर से आई थी
यानी अब तक तू ज़िंदा है ही क्या

बाद मुद्दत वो कल मिली मुझ सेे
मुँह छिपाने लगी वो कहती क्या

बे-वफ़ाई में जो तेरा है मक़ाम
तेरे आगे है मेरी हस्ती क्या

  - SHIV SAFAR

Baaten Shayari

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