sukoon hai aur hooñ aabaad phir main | सुकूँ है और हूँ आबाद फिर मैं

  - SHIV SAFAR

सुकूँ है और हूँ आबाद फिर मैं
ये कैसी पा रहा हूँ दाद फिर मैं

तलाशी आज तक जारी है मेरी
नज़र आया न तेरे बाद फिर मैं

हुकूमत आज भी उसकी है मुझपे
कि सोती है ये पहले याद फिर मैं

मुहब्बत फिर मुझे रास आ रही है
या होने को हूॅं अब बर्बाद फिर मैं

मेरे हाथों में दम तोड़ा था उसने
किए जाता हूँ क्यूँँ फ़रियाद फिर मैं

परिंदे ख़त्म हो जाएँगे इक दिन
ये सुनकर कह पड़ा सय्याद फिर मैं

सो इक दिन 'इश्क़ से टकरा गया और
सदा रहने लगा नाशाद फिर मैं

जो बन पाऊँ तेरी बाहों का क़ैदी
तो ख़ुद को मान लूँ आज़ाद फिर मैं

जो दिल तू छोड़ देगा साथ मेरा
सुनाऊँगा किसे रूदाद फिर मैं

सफ़र का आख़िरी मोड़ आ गया है
न कर पाऊँगा अब इरशाद फिर मैं

  - SHIV SAFAR

More by SHIV SAFAR

As you were reading Shayari by SHIV SAFAR

Similar Writers

our suggestion based on SHIV SAFAR

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari