सुकूँ है और हूँ आबाद फिर मैं
ये कैसी पा रहा हूँ दाद फिर मैं
तलाशी आज तक जारी है मेरी
नज़र आया न तेरे बा'द फिर मैं
हुकूमत आज भी उस की है मुझ पे
कि सोती है ये पहले याद फिर मैं
मुहब्बत फिर मुझे रास आ रही है
या होने को हूँ अब बर्बाद फिर मैं
मेरे हाथों में दम तोड़ा था उस ने
किए जाता हूँ क्यूँ फ़रियाद फिर मैं
परिंदे ख़त्म हो जाएँगे इक दिन
ये सुन कर कह पड़ा सय्याद फिर मैं
सो इक दिन इश्क़ से टकरा गया और
सदा रहने लगा नाशाद फिर मैं
जो बन पाऊँ तेरी बाहों का क़ैदी
तो ख़ुद को मान लूँ आज़ाद फिर मैं
जो दिल तू छोड़ देगा साथ मेरा
सुनाऊँगा किसे रूदाद फिर मैं
सफ़र का आख़िरी मोड़ आ गया है
न कर पाऊँगा अब इरशाद फिर मैं















