padhaai men ye man phir kya lagega | पढ़ाई में ये मन फिर क्या लगेगा

  - SHIV SAFAR

पढ़ाई में ये मन फिर क्या लगेगा
तेरा दिल जब किसी से जा लगेगा

मिलो तो लेके डेरीमिल्क जाना
यक़ीं मानो उसे अच्छा लगेगा

अगर बेकारी के हों दिन तुम्हारे
तो घर का शहद भी खट्टा लगेगा

मैं याद आऊँ तो शीशा तोड़ देना
वो बिल्कुल हू-ब-हू मुझ सा लगेगा

पिता से क़द बड़ा हो जाए लेकिन
हमेशा माँ को तू बच्चा लगेगा

वो लड़की है जो हँस के बोल देगी
तो उसका झूठ भी सच्चा लगेगा

मगर हम लड़के सीना चीर भी दें
तो सबको ख़ून भी झूठा लगेगा

ख़ुदा ख़ाली नहीं है मस्ज़िदों में
दुआ करना है तो पैसा लगेगा

अगर बे को वफ़ा के आगे रख दूँ
मेरा विश्वास है तुझ सा लगेगा

मैं तेरा कुछ नहीं ये कहने वाली
तेरा भाई मेरा साला लगेगा

करा दूँगा तेरा रीचार्ज़ भी मैं
मगर बदले में इक बोसा लगेगा

सिवा मेरे कोई भी साथ तेरे
मेरी मानो बहुत भद्दा लगेगा

तेरे कहने पे मर जाऊँ मैं लेकिन
सफ़र सोता हुआ कैसा लगेगा

  - SHIV SAFAR

Kiss Shayari

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