raat se hokar shuroo thii khatm hoti raat men | रात से होकर शुरू थी ख़त्म होती रात में

  - SHIV SAFAR

रात से होकर शुरू थी ख़त्म होती रात में
याद है कुछ कितने दिन गुज़रे हैं अपनी बात में

अपने सीने में समंदर को लिए फिरते हैं हम
कह दो तूफ़ानों से रहना सीख लें औक़ात में

बिजलियों से डर के बाहों में सिमट जाते हो तुम
ठीक है फिर हम मिलेंगे मौसम-ए-बरसात में

इस दफ़ा हो जाओ तुम हम सेे जुदा लेकिन सुनो
फिर से आऊँगा जनम लेके तुम्हारी जात में

ख़ुद उड़ानी पड़ती है अपनी अना की धज्ज़ियाँ
भीख भी मिलती नहीं है अब यहाँ खैरात में

  - SHIV SAFAR

Anjam Shayari

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