ab tak bhi dard sahne ki aadat nahin hui | अब तक भी दर्द सहने की आदत नहीं हुई

  - SHIV SAFAR

अब तक भी दर्द सहने की आदत नहीं हुई
यानी कि तुमको यार मुहब्बत नहीं हुई

करते हैं चल ऐ दिल मेरे कोशिश ये आख़िरी
डोली में बस वो बैठी है रुख़्सत नहीं हुई

कैसे मैं मान लूँ कि मुहब्बत है आज भी
अरसे हुए हैं कोई शिकायत नहीं हुई

कहना तो था पर उसने यूँँ देखा मेरी तरफ़
मेरे लबों से कोई भी हरकत नहीं हुई

बुढ़िया जो घर में रहती थी जिस दिन से मर गई
बाद उसके घर में कोई भी बरकत नहीं हुई

सच है कि ज़िक्र-ए-''इश्क़ से बचता रहा हूँ मैं
सच ये भी है मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई

यादों में उसकी आज भी बहते हैं अश्क़ यूँँ
जैसे ये कल की बात हो मुद्दत नहीं हुई

  - SHIV SAFAR

Aansoo Shayari

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