gar main paagal hota to phir kaisa hota | गर मैं पागल होता तो फिर कैसा होता

  - SHIV SAFAR

गर मैं पागल होता तो फिर कैसा होता
शायद जैसा अब हूँ बिल्कुल वैसा होता

वो आज मेरी इन बाँहों में सोई रहती
ऐ काश मेरे भी पास अगर कि पैसा होता

तू मिलती नहीं तो क्या मालूम मैं क्या करता
पर हाल न मेरा तय है अब ऐसा होता

क्या होता गर मैं भी होता हरजाई तो
जो भी होता लेकिन न तेरे जैसा होता

  - SHIV SAFAR

Pagal Shayari

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