अभी तक हूँ मैं ज़िन्दा तू कहीं बरहम नहीं है ना
कि तेरी याद में रोना ये मेरा कम नहीं है ना
तेरी ख़ुशियों की ख़ातिर 'उम्र भर रोता रहूँ लेकिन
नहीं है साथ तू तो ज़िंदगी में ग़म नहीं है ना
तुम्हारे घर से कोसों दूर गर बरकत लगे रहने
तो पहले देख लेना माँ की आँखें नम नहीं है ना
हकीमों से कोई पूछे मेरा दम घुट रहा है क्यूँँ
जो दिल पर मल रहे हैं ये कहीं मरहम नहीं है ना
ये दिल का घाव ही तो आख़िरी उसकी निशानी है
इसे भी ख़त्म कर दूंगा कि अब हम, हम नहीं है ना
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