falak ke paas tere aa gaya hooñ | फ़लक के पास तेरे आ गया हूँ

  - SHIV SAFAR

फ़लक के पास तेरे आ गया हूँ
उचक के पास तेरे आ गया हूँ

मैं काली गीट तू कैरम की है क़्वीन
सरक के पास तेरे आ गया हूँ

तू है शतरंज की रानी मैं प्यादा
मटक के पास तेरे आ गया हूँ

शज़र पे आम तू और मैं हूँ बन्दर
लपक के पास तेरे आ गया हूँ

दिखा हो घोंसला पंछी को जैसे
चहक के पास तेरे आ गया हूँ

पता था साँप है सीढ़ी नहीं तू
बहक के पास तेरे आ गया हूँ

बचा लेगा तू सो दुनिया को गाली
मैं बक के पास तेरे आ गया हूँ

हिरण तू, मैं हरे पत्तों की डाली
लचक के पास तेरे आ गया हूँ

जवाँ लड़का मैं, तू सिगरेट की है लत
भटक के पास तेरे आ गया हूँ

खुले बालों में उड़ के पंखुड़ी सी
अटक के पास तेरे आ गया हूँ

तू नग़्मा है, मैं रक़्क़ासा का हूँ पैर
थिरक के पास तेरे आ गया हूँ

तू बचपन सी, मैं गोलू मोलू सा गेंद
ढरक के पास तेरे आ गया हूँ

तू दुल्हन, मैं तेरे हाथों की चूड़ी
खनक के पास तेरे आ गया हूँ

वो पैमाने वो ज़िद विद दोस्तों के
पटक के पास तेरे आ गया हूँ

पकड़ रक्खी थी दुनिया हाथ लेकिन
झटक के पास तेरे आ गया हूँ

‘सफ़र’ तुझ सा मिला कोई न अच्छा
सो थक के पास तेरे आ गया हूँ

  - SHIV SAFAR

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