अगर अच्छी रही आदत तुम्हारी
करेंगे सब यहाँ इज़्ज़त तुम्हारी
फ़कीरी में ही हम अच्छे-भले हैं
मुबारक हो ये धन-दौलत तुम्हारी
अगर मेयार से नीचे गिरोगे
चली जाएगी ये शोहरत तुम्हारी
किसी से फोन पर घंटों बिताना
बुरी लगने लगी हरकत तुम्हारी
बिना ही चाय पीए जा रहे हो
यही अच्छी नहीं उजलत तुम्हारी
मिला लो आँख ही गर चाहते हो
ज़रा मैं देख लूँ हिम्मत तुम्हारी
As you were reading Shayari by Shivsagar Sahar
our suggestion based on Shivsagar Sahar
As you were reading undefined Shayari