दो घड़ी प्यार जताता है चला जाता है
वो मुझे यार बनाता है चला जाता है
चुगने देता है परिंदों को भले हर दाने
फिर वहाँ जाल बिछाता है चला जाता है
रोज़ आता वो मेरे दुःख में सियासत करने
ख़ुद को हमदर्द बताता है चला जाता है
चूक होती नहीं उसका भी यही कारण है
तीर आँखों से चलाता है चला जाता है
आप तो ख़ैर तवज्जोह भी नहीं देते हैं
वो भले हाथ मिलाता है चला जाता है
धूप में देर से चलते हुए थक जाता है
फिर भी वो पाँव बढ़ाता है चला जाता है
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