कोई लड़की से क्यूँँ कहता नहीं है
तुम्हारे योग्य वो दूल्हा नहीं है
पड़ोसी के यहाँ शादी है लेकिन
मिरे घर भर को अब न्योता नहीं है
किसी के पास में ज़ेवर बहुत हैं
किसी के माथ में टीका नहीं है
अकड़कर कह रहा है माँ से बेटा
दवाई के लिए पैसा नहीं है
हुनर ले कर भला तुम क्या करोगे
तुम्हारे पास तो जज़्बा नहीं है
उछालें तो भला कैसे उछालें
हमारे पास में मुद्दा नहीं है
— Shivsagar Sahar















