जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थेवो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्यामुझे यूँ वहशतों की मौत मारने वालेबचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या— ALI ZUHRI