लबों पे रख लबों को तू मुझे ख़ामोश करती है
लिपट कर जिस्म से मेरे मुझे रू-पोश करती है
नशे की लत नहीं मुझको नशा बेशक ख़राबी है
गुलाबी आँख जाँ तेरी मुझे मदहोश करती है
तेरे पहलू में रहने से महकता है बदन मेरा
निखारे रूप को मेरे मुझे गुल-पोश करती है
ज़माने भर की सब तल्खी़ अचानक भूल जाता हूँ
निगाहों से मुझे अपनी तू जब मय- नोश करती है
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