किसी का दिल दुखा होगा
तुम्हें अच्छा लगा होगा
तुम्हारे पाँव पड़ते ही
मिरा घर घर हुआ होगा
यहाँ हर दोस्त के अंदर
कोई दुश्मन छुपा होगा
जो अपना हिस्सा तक दे दे
वो केवल इक पिता होगा
वो मूरत बनने से पहले
कही पत्थर हुआ होगा
चलाओ बाण सागर पर
तभी अपना भला होगा
उदासी बेचता हूँ मैं
ये तो तुम को पता होगा
वही जाता ज़माना है
जहाँ जाना मना होगा
'करन' तुम को गिराने में
कोई अपना लगा होगा
— Karan Shukla















