Karan Shukla

Karan Shukla

@Writerkaranshukla

Karan Shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Karan Shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

न तो ये देखते बनते न सुनते अच्छे लगते हैं
कहीं मंज़र कहीं क़िस्से यहाँ कुछ होते ऐसे हैं

कमी कैसी मिरे अंदर गया तू छोड़ कर अपनी
कि अब तेरी कमी को जाने कितने लोग भरते हैं

Karan Shukla

दुख में भी जो ख़ुशी से यहाँ खिलते हैं
सारे ज़ख़्मों को आख़िर तो ये सिलते हैं

ये रिवाज़ अच्छा लगता है हमको कहीं
हाथ नइँ दोस्तों से गले मिलते हैं

Karan Shukla

कमी कैसी मिरे अंदर गया तू छोड़ कर अपनी
कि अब तेरी कमी को जाने कितने लोग भरते हैं

Karan Shukla

जो था लौटा वो दिया हमने ख़ुशी से
उस मुहब्बत का निशाँ कोई बचा नइँ

Karan Shukla

जो होगी रौशनी दिल में दिवाली हम मनाएँगे
तुम्हें अच्छी जो लगती हो मिठाई हम खिलाएँगे

नहीं भरना मिरे हिस्से का रंगोली में कोई रंग
उन्हीं रंगों से मेरी ज़िंदगी में रंग आएँगे

Karan Shukla