@Writerkaranshukla
Karan Shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Karan Shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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न तो ये देखते बनते न सुनते अच्छे लगते हैं
कहीं मंज़र कहीं क़िस्से यहाँ कुछ होते ऐसे हैं
कमी कैसी मिरे अंदर गया तू छोड़ कर अपनी
कि अब तेरी कमी को जाने कितने लोग भरते हैं
दुख में भी जो ख़ुशी से यहाँ खिलते हैं
सारे ज़ख़्मों को आख़िर तो ये सिलते हैं
ये रिवाज़ अच्छा लगता है हमको कहीं
हाथ नइँ दोस्तों से गले मिलते हैं
जो होगी रौशनी दिल में दिवाली हम मनाएँगे
तुम्हें अच्छी जो लगती हो मिठाई हम खिलाएँगे
नहीं भरना मिरे हिस्से का रंगोली में कोई रंग
उन्हीं रंगों से मेरी ज़िंदगी में रंग आएँगे