हमारी ही खिंचाई पे उतर आए
सभी अपने बुराई पे उतर आए
पिता का बोझ कम करने को ये लड़के
बहुत जल्दी कमाई पे उतर आए
जो भागे थे घरों से इश्क़ करने को
वो सब इक दिन जुदाई पे उतर आए
ग़ज़ब है बात जब पकड़ी गई उन की
तो फ़ौरन फिर सफ़ाई पे उतर आए
जो अपने ख़ून से सींचे कभी हम ने
वही रिश्ते लड़ाई पे उतर आए
वफ़ा में धोके खाते खाते इक दिन हम
यहाँ फिर बे-वफ़ाई पे उतर आए
— Karan Shukla















