kisi ko ab kisi se vaasta kya | किसी को अब किसी से वास्ता क्या

  - Karan Shukla

किसी को अब किसी से वास्ता क्या
मिलो तो ठीक वरना आपका क्या

किया जब वार उसने लब पे लब थे
सुकूँ था इतना सो मैं चीख़ता क्या

बचे हैं जान से हम जाते जाते
दिवाना यार कहता है किया क्या

जो पूछा है तू बस उतना बता दे
उसे ख़ुदस भी ज़्यादा चाहता क्या

बड़ी ख़ामोशी बिखरी है गली में
वो लड़का कमरा ख़ाली कर गया क्या

तू फिर घुटकर मरेगी प्यारी बेटी
अगर सोचा ज़माना सोचता क्या

‘करन’ ताला लगा है उस बदन पे
किसी का हो गया क़ब्ज़ा भला क्या

  - Karan Shukla

Beti Shayari

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