किसी को अब किसी से वास्ता क्या
मिलो तो ठीक वरना आपका क्या
किया जब वार उसने लब पे लब थे
सुकूँ था इतना सो मैं चीख़ता क्या
बचे हैं जान से हम जाते जाते
दिवाना यार कहता है किया क्या
जो पूछा है तू बस उतना बता दे
उसे ख़ुदस भी ज़्यादा चाहता क्या
बड़ी ख़ामोशी बिखरी है गली में
वो लड़का कमरा ख़ाली कर गया क्या
तू फिर घुटकर मरेगी प्यारी बेटी
अगर सोचा ज़माना सोचता क्या
‘करन’ ताला लगा है उस बदन पे
किसी का हो गया क़ब्ज़ा भला क्या
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