koii mausam koii chehra mujhe phir yaad aaya hai | कोई मौसम कोई चेहरा मुझे फिर याद आया है

  - Karan Shukla

कोई मौसम कोई चेहरा मुझे फिर याद आया है
कभी दिल से तिरे होकर कोई बर्बाद आया है

कमाई सब लगाकर हम उसे परदेस भेजे थे
मगर वो देखने हमको ही बरसों बाद आया है

किसी के हाथ में उसका ख़ुशी से हाथ यूँँ देकर
कोई रोता हुआ सब छोड़कर आज़ाद आया है

बताएँ क्या किसी को ज़िंदगी अब तेरे बारे में 
हमें हर उम्र में जा के नया इक स्वाद आया है

तिरी इन ख़्वाहिशों के आगे ये बाज़ार है ही क्या
चलो अब देखते हैं लो अमीनाबाद आया है

  - Karan Shukla

Dil Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Karan Shukla

As you were reading Shayari by Karan Shukla

Similar Writers

our suggestion based on Karan Shukla

Similar Moods

As you were reading Dil Shayari Shayari