अगर तस्वीर जो तेरी हटा दूँगा
तो अपने आप को ही फिर सज़ा दूँगा
नहीं होना इसे ले कर परेशाँ तू
तिरे इज़हार का वो ख़त जला दूँगा
बिछड़ते वक़्त तुम को दूर तक देखे
भला सोचो तुम्हें कैसा भुला दूँगा
बिगाड़ा है उसी इक दोस्त ने मुझ को
जो कहता था तुझे क़ाबिल बना दूँगा
उसे भी बद-दुआ लगती यहाँ जिस से
कहाँ सबने हो तुझ को मैं दुआ दूँगा
— Karan Shukla















