बहुत सोच के फ़ैसला कर लिया
अलग सब से अब रास्ता कर लिया
वही ढंग है आज भी जीने का
तिरी याद आई नशा कर लिया
नए इश्क़ में उस के दिक़्क़त न हो
सो हम ने ज़रा फ़ासला कर लिया
सही राय देंगे मुझे आप लोग
यही सोच के राब्ता कर लिया
गले से लिपट कर ये कहती है वो
ये कब हिज्र का फ़ैसला कर लिया
अकेले उठाओ ये ज़ख़्मी बदन
कि अब सबने तो फ़ासला कर लिया
— Karan Shukla















