तुमपे मरने की हद है
कुछ भी करने की हद है
कब तक झेले तुझ को हम
अब दिल भरने की हद है
उन की इज़्ज़त रखने को
चुप भी करने की हद है
छिपकली हो या जानाँ कुछ
इनसे डरने की हद है
— Karan Shukla
कुछ भी करने की हद है
कब तक झेले तुझ को हम
अब दिल भरने की हद है
उन की इज़्ज़त रखने को
चुप भी करने की हद है
छिपकली हो या जानाँ कुछ
इनसे डरने की हद है
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling