पुकारो न तुम आने वाला नहीं हूँ
किसी को दिशा मैं दिखाता नहीं हूँ
ख़ुदा पर भरोसा बहुत है मगर बस
मुक़द्दर भरोसे भी बैठा नहीं हूँ
चलेगी क़लम चाहे सर हो क़लम पर
कभी झूठ के दर पे ठहरा नहीं हूँ
सताने लगे जब ज़माने के सच्चे
उसी दिन समझना अकेला नहीं हूँ
— Shubham Rai 'shubh'















