बे-वफ़ा से क्या वफ़ा करे कोई
दिल लगा के जब दग़ा करे कोई
नर्क से हरगिज़ नहीं हसद होगी
दोस्त ही जब डँसा करे कोई
हैं क़रीबी मेरे जान के दुश्मन
जीते जी मेरी 'अज़ा करे कोई
मुँह लगाया बारी बारी से उसने
होंट को उसके सफ़ा करे कोई
दोस्ती में ही दग़ा किया सबने
सामने आकर जफ़ा करे कोई
कोसते है, देख के तरक़्क़ी अब
मेरे हिस्से में दु'आ करे कोई
शुभ घड़ी को बार बार मत देखो,
अब नहीं है वक़्त क्या करे कोई
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