यही मौक़ा है दिल को हार जाने का

दिखेगा दर्द तब सारे ज़माने का

ना-उम्मीदी दिखेगी सामने तुम को
करेगा मन कि बस जीवन गँवाने का

युधिष्ठिर से समय का वार पूछो तुम
बताएँगे सफ़र तब राज्य पाने का

कि सीखो राम से तुम त्याग का मतलब
पिता का मान रख वनवास जाने का

धरा का धुर-विरोधी ही समझना तुम
जो उस को दे रहा शह ख़ूँ बहाने का

हताशा दिख रही मायूस मत हो तुम
इरादा बस रखो मक़सद को पाने का

मिलेगा ख़ूब मौक़ा ग़म छुपाने का
कि मौक़ा है अभी बस मुस्कुराने का

— Shubham Rai 'shubh'

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Justaju Shayari

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