सवाल क्या है जवाब क्या है
खुले न आँखें तो ख़्वाब क्या है
ज़बाँ सही है अगर तुम्हारी
तू ही बता फिर ख़राब क्या है
मिटेंगे हम तो मिटोगे तुम भी
या पूछ राह-ए-सवाब क्या है
सफ़र में जिन के भरे हों काँटे
जा पूछ उन से गुलाब क्या है
मिले जो इज़्ज़त बिना ख़रीदे
तो इस से ज़्यादा निसाब क्या है
रहे सलामत जो दोस्ताना
बड़ा जहाँ में ख़िताब क्या है
रहे ये जीवन जो निष्कलंकित
तो इस से बढ़िया किताब क्या है
— Shubham Rai 'shubh'















